प्रकाश आंबेडकर का जीवन परिचय | Prakash Ambedkar Biography

एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर भारत की एक प्रसिद्ध राजनीतिक हस्ती हैं। वो बाबासाहब आंबेडकर के पोते हैं और महाराष्ट्र की राजनीतिक पार्टी वंचित बहुजन आघाडी (VBA) के सुप्रीमो है। उन्होंने जनवरी 2018 में ‘महाराष्ट्र बंद‘ का आह्वान किया था, जिसके तहत मुंबई समेत सारा महाराष्ट्र एक दिन बंद था। इससे आप उनकी राजनीतिक शक्ति का अंदाजा लगा सकते हैं। चलिए इस लेख के माध्यम से हम इस महत्वपूर्ण हस्ती के जीवन के बारे में विस्तार से जानते हैं।Prakash Ambedkar Biography

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Prakash Ambedkar Biography in Hindi

नाम

 प्रकाश यशवंत आंबेडकर

जन्म

10 मई 1954 (मुंबई)

व्यवसाय

राजनीतिज्ञ, वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता

शिक्षा

  • सेंट स्टैनिस्लॉस हाई स्कूल, मुंबई

  • सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स, मुंबई (BA)

  • सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ़ लॉ, मुंबई (LLB)

उपनाम

बालासाहब आंबेडकर

धर्म

माता-पिता

मीरा आंबेडकर एवं यशवंत भीमराव आंबेडकर

पत्नी

अंजली आंबेडकर (विवाह : 1993)

संतान

सुजात (बेटा)

राजनीतिक पार्टी

  • वंचित बहुजन आघाडी (2019 से)

  • भारिप बहुजन महासंघ (1994 – 2019)

  • रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (1994 से पहले; 1998 - 1999)

सांसद (MP)

  • लोक सभा सदस्य (1999 – 2004)

  • लोक सभा सदस्य (1998 – 1999)

  • राज्य सभा सदस्य (1990 – 1996)

भाषाएं

मराठी, हिंदी और अंग्रेजी

पता

यशवंत निवास, कवराम सोसायटी, अकोला- 444001

ई-मेल

वेबसाईट

डॉ आंबेडकर के पोते – प्रकाश आंबेडकर का जीवन परिचय

प्रकाश यशवंत आंबेडकर (जन्म 10 मई 1954) एक भारतीय राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक और वकील हैं। वह संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के पोते हैं (Grandson of Dr. Babasaheb Ambedkar)। वह वंचित बहुजन आघाड़ी नामक राजनीतिक दल के अध्यक्ष हैं, जिसकी स्थापना उन्होंने 2019 में की थी। वह तीन बार के सांसद (सांसद) हैं। वह भारत के 12वीं और 13वीं लोकसभा अकोला निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य थे। उन्होंने भारतीय संसद के दोनों सदनों में कार्य किया है। उन्हें बालासाहब आंबेडकर के नाम से भी जाना जाता है। प्रकाश आंबेडकर की उम्र अब 67 वर्ष से ज्यादा है, फिर भी वो राजनितिक जीवन में लगातार सक्रीय दिखते है।

 

व्यक्तिगत जीवन

प्रकाश आंबेडकर का जन्म 10 मई 1954 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था। वह बाबासाहब आंबेडकर और रमाबाई आंबेडकर के सबसे बड़े पोते हैं। ऐसा कहा जाता है की उनका ‘प्रकाश’ नाम बाबासाहेब द्वारा रखा गया है। प्रकाश आंबेडकर के पिता का नाम यशवंत आंबेडकर (भैयासाहेब) और माता का नाम मीरा है। 1977 में उनके पिताजी की मृत्यु हुई थी, उनकी माता अभी भी जीवित है। प्रकाश आंबेडकर नवयान बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं, क्योकि उनके दादा ने अपने परिवार समेत 1956 को बौद्ध धर्म अपनाया था। उनके दो छोटे भाई भीमराव और आनंदराज हैं, और एक बहन रमा हैं जिनकी शादी आनंद तेलतुम्बडे से हुई है। 1993 में प्रकाश आंबेडकर की शादी अंजलि मायदेव से हुई है, जिनसे उनका एक बेटा – सुजात है।

 

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Prakash Ambedkar Biography

 

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

1972 में प्रकाश आंबेडकर ने अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा सेंट स्टैनिस्लॉस हाई स्कूल, मुंबई से पूरी की। 1978 में, उन्होंने सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स से बैचलर ऑफ़ आर्ट्स (BA) डिग्री प्राप्त की, और 1981 में उन्होंने मुंबई के सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ़ लॉ में बैचलर ऑफ़ लॉ (LLB) डिग्री प्राप्त की।

 

राजनीतिक कैरियर

4 जुलाई 1994 को प्रकाश आंबेडकर ने भारिप बहुजन महासंघ नामक राजनीतिक दल की स्थापना की। यह पार्टी उनके दादा डॉक्टर बाबासाहब आंबेडकर के निर्देश पर उनके महापरिनिर्वाण के उपरांत गठित की गई “रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया” इस राजनीतिक पार्टी के कई गुटों में से एक थी। भारिप बहुजन महासंघ माध्यम से प्रकाश आंबेडकर ने अकोला नगरपालिका चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी जैसे स्थापित राजनीतिक दलों से चुनाव लड़ा, और विजयी हुए। प्रकाश आंबेडकर द्वारा लाई गई नई सामाजिक इंजीनियरिंग के माध्यम से सफलता प्राप्त हुई, जिसे बाद में “अकोला पैटर्न” के रूप में जाना गया। पार्टी का विस्तार 1995 के बाद भी जारी रहा, और कुछ गैर-दलित दल और संगठन भारिपा बहुजन महासंघ में शामिल हो गए।

वह भारतीय संसद के सदस्य (सासंद) भी रहे हैं। 1990 – 1996 के दौरान प्रकाश आंबेडकर राज्य सभा के सदस्य थे। वह 1998 में अकोला लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 12वीं लोकसभा चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के उम्मीदवार के रूप में चुने गए थे। 1999 में इसी निर्वाचन क्षेत्र से दूसरी बार वे 13वीं लोकसभा चुनाव के लिए भारिप बहुजन महासंघ के उम्मीदवार के रूप में चुने गए और 2004 तक वे लोकसभा के सदस्य रहे। इस प्रकार प्रकाश आंबेडकर भारतीय संसद के दोनों सदनों के सदस्य रहे।

आंबेडकर ने एक ओर दलितों को फिर से संगठित करने की नीति अपनाई, और दूसरी ओर उन विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने के लिए एक उदारवादी रेखा का पालन किया, जो दलितों के प्रति सहानुभूति रखते थे। उनके समर्थन से ही उन्होंने दो बार गैर-आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा का चुनाव लड़ा। हालांकि वह इन चुनावों में सफल नहीं हो सके, इसके बावजूद उन्होंने दोनों निर्वाचन क्षेत्रों पर बड़ी संख्या में वोट हासिल किए।

आरपीआई (रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया) ने अपनी मांगों पर जोर देने के लिए नासिक से मुंबई तक एक मार्च का आयोजन किया, जिसमें प्रमुख मांग थी उनके दलित किसानों को वतन भूमि का हस्तांतरण। (ब्रिटिश राज के पहले और बाद में, कुछ भूमि लोगों को उनके द्वारा सरकार या समुदाय या दोनों को प्रदान की गई सेवाओं के लिए दी गई थी। इन भूमि को स्थानीय कानून में “वतन भूमि” भी कहा जाता है और महाराष्ट्र में कई वतन 1950 और 1960 के बीच समाप्त कर दिए गए थे।) इस मार्च के जवाब में, सरकार ने प्रकाश आंबेडकर के साथ एक सदस्य के रूप में एक समिति नियुक्त की।

Prakash Ambedkar biography

 

आरपीआई को सबसे बड़ी सफलता 1988 में मिली जब प्रकाश आंबेडकर ने अन्य दलित संगठनों के साथ मिलकर मुंबई में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। यह अवसर डॉ बाबासाहब आंबेडकर के लेखन के आधिकारिक प्रकाशन से “रिडल्स ऑफ हिंदुइज्म” नामक ग्रंथ के एक हिस्से को हटाने के एक कदम के बारे में विवाद था। बाबासाहब की इस किताब का एक हिस्सा हटाने के कदम को शिवसेना का समर्थन था, जो इस समय तक एक हिंदू राजनीतिक संगठन के रूप में उभर रही थी। इस उद्देश्य के लिए सभी दलित एवं बौद्ध संगठनों को एक साथ लाने के लिए, प्रकाश आंबेडकर ने आंबेडकर विचार संवर्द्धक समिति (एवीएसएस) का गठन किया।

5 फरवरी 1988 को प्रकाश आंबेडकर, आरएस गवई और अन्य के नेतृत्व में, दलितों ने एक विशाल शक्ति प्रदर्शन किया, जिसमें बीआर आंबेडकर के पांच लाख से अधिक अनुयायि महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से तथा गुजरात और अन्य राज्यों से मुंबई शहर के बीचों-बीच आए थे। उस समय तक का यह एक सबसे विशाल मार्च (मोर्चा) था। मुंबई में विशाल दलित प्रदर्शन के कुछ दिनों के भीतर, शिवसेना, मराठा महासंघ और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के विभिन्न समूहों और दलित पैंथर्स के प्रतिनिधियों को महाराष्ट्र राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा बुलाए गए 10 फरवरी को एक बैठक में ‘रिडल्स इन हिंदुइज्म’ के मुद्दे को हल किया गया। बैठक में यह सहमति हुई कि आंबेडकर के कार्यों के चौथे खंड में प्रासंगिक परिशिष्ट बरकरार रखा जाएगा; यह स्पष्ट करने के लिए केवल एक पंक्ति जोड़ी जाएगी कि “महाराष्ट्र सरकार हिंदू देवताओं पर बी आर आंबेडकर की टिप्पणियों से सहमत या असहमत नहीं हैं”।

प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व में भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के साथ मिलकर काम कर रहे बहुजन महासंघ इस एक राजनीतिक दल वजह से प्रकाश आंबेडकर ने “भारतीय रिपब्लिकन क्ष बहुजन महासंघ” (संक्षेप में – भारिप बहुजन महासंघ) इस नए राजनीतिक दल का गठन फरवरी 1993 में किया गया था। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया का मराठी अनुवाद भारतीय रिपब्लिकन पक्ष होता है जिसे संक्षिप्त में भारिप या रिपाई (Republican Party of India) भी कहते हैं। उस वर्ष की गर्मियों में, भारिप बहुजन महासंघ के उम्मीदवार ने महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में किनवट विधानसभा सीट जीती, और कांग्रेस और भाजपा के प्रतियोगियों को हराया। Prakash Ambedkar biography

 

भारतीय रिपब्लिकन पार्टी और बहुजन महासंघ के गठबंधन ने दलितों और ओबीसी के एक संयुक्त मोर्चे की कल्पना की, जिनकी सांस्कृतिक पहचान अनिवार्य रूप से गैर-ब्राह्मण थी। बहुजन महासंघ ने तर्क दिया कि ब्राह्मणवादी सामाजिक व्यवस्था में, दलित और ओबीसी दोनों ही सांस्कृतिक रूप से खुद को समान रूप से उत्पीड़ित पाते हैं। बहुजन महासंघ ने बौद्ध, सिख, जैन और मुसलमानों के साथ-साथ शूद्र (ओबीसी) और अति-शूद्र (दलित), जनजाति (आदीवासी), महिलाएं, गरीब मराठा और गरीब ब्राह्मण जैसे जाति समूहों को शामिल करने के लिए ‘बहुजन’ श्रेणी को परिभाषित किया था। बहुजन श्रेणी में इस प्रकार सभी सहित जो जाति, वर्ग और लिंग शोषण के अधीन हैं, उसे शामिल किया गया। वैसे मराठा और ब्राह्मण जातियों को महाराष्ट्र में सवर्ण या ऊँची जातियां मानी जाती हैं।

आंबेडकर परिवार की तीसरी पीढ़ी

Third generation of the Ambedkar family

yashwant ambedkar family
बाबासाहब के पुत्र – यशवंत आंबेडकर इंग्लैंड जाते समय अपने परिवार के सदस्यों के साथ हवाई अड्डे पर। बाएं से – भीमराव (पुत्र), प्रकाश (पुत्र), यशवंत आंबेडकर (स्वयं), मीराबाई (पत्नी), रमाबाई (बेटी ) और आनंदराज (पुत्र)। – yashwant ambedkar family (Image credit – VBA tweeter)

1 जनवरी 1818 को हुई, कोरेगांव की लड़ाई में लड़ने वाले महार सैनिकों की याद में, उनके वंशज (बौद्ध) उन्हें सम्मानित करने के लिए हर साल 1 जनवरी को कोरेगांव भीमा जाते हैं। इस लड़ाई 200वीं वर्षगांठ मनाने के लिए, 1 जनवरी 2018 को, बौद्धों के साथ-साथ कुछ हिंदू दलित, ओबीसी और सिख लोगों ने महाराष्ट्र के पुणे जिले के कोरेगांव भीमा में ‘जय स्तम्भ’ (विजय स्तंभ) का दौरा किया। लेकिन वहां कट्टर हिन्दुओं ने बौद्ध एवं दलितों पर हमला किया, उन पर पथराव किया और उनकी गाडीओं को भी क्षतिग्रस्त किया। (1 जनवरी 2018 को हुए हिंदुत्ववादी लोगों के हमले का जिक्र आपको English Wikipedia पर नहीं मिलेगा; क्योंकि वहां कट्टर हिंदू लोग ही विकिपीडियन बने हुए हैं।) Prakash Ambedkar biography

 

प्रकाश आंबेडकर ने संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे पर इन हमलावर हिंदुत्ववादी लोगों को बहकाने का आरोप लगाया और हमले की पुलिस जांच और इन दोनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की। लेकिन महाराष्ट्र सरकार और राज्य पुलिस ने दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. इसलिए 3 जनवरी 2018 को उन्होंने (प्रकाश आंबेडकर) महाराष्ट्र के लोगों से “महाराष्ट्र बंद” का आह्वान किया। महाराष्ट्र को बंद करने के इस आह्वान को लोगों की भारी प्रतिक्रिया मिली और बंद सफल रहा। बंद मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में देखा गया। प्रकाश आंबेडकर के अनुसार, 50% से अधिक महाराष्ट्रीयन लोगों ने बंद में भाग लिया। महाराष्ट्र राज्य के आंबेडकरवादी, बौद्ध, हिंदू दलित एवं ओबीसी लोग इस बंद में शामिल रहे। (पहले माना जाता था की केवल शिवसेना के बाल ठाकरे के पास मुंबई को बंद करने की शक्ति थी।) इसके बाद, प्रकाश आंबेडकर की राजनीतिक शक्ति में वृद्धि हुई। वे आंबेडकरवादी और बहुजन समुदाय के केंद्र में आए। विशेष रूप से युवा वर्ग उनके समर्थक बने।

प्रकाश आंबेडकर ने 20 मार्च 2018 को नई राजनीतिक पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी की शुरुआत की, जिसकी विचारधारा मुख्य रूप से संविधानवाद, आंबेडकरवाद, धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और प्रगतिवाद पर जोर देती है। वंचित बहुजन आघाड़ी ने महाराष्ट्र में लोकसभा 2019 के चुनाव से पहले अपने राजनीतिक दल को पंजीकरण कराया था। इसे लगभग 100 छोटे राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन प्राप्त है। अब भी वो वंचित बहुजन आघाड़ी के सुप्रीमो हैं।

14 मार्च 2019 को, प्रकाश आंबेडकर ने घोषणा की है कि भारिप बहुजन महासंघ का विलय वंचित बहुजन आघाड़ी में होगा। उन्होंने कहा कि भारिप-बहुजन महासंघ की सफलता के माध्यम से सोशल इंजीनियरिंग के ‘अकोला पैटर्न’ के बावजूद, ‘भारिप’ (आरपीआई=रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया) शब्द ने पार्टी के विस्तार को (बौद्धों एवं दलितों के बीच) सीमित कर दिया था। उन्होंने आगे कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद भारिप-बहुजन महासंघ का विलय वंचित बहुजन आघाड़ी में हो जाएगा, क्योंकि वंचित बहुजन आघाड़ी व्यापक अर्थों में स्वीकार्य है। 24 मार्च 2019 को, भारत के चुनाव आयोग ने वंचित बहुजन आघाड़ी को एक पंजीकृत ‘राजनीतिक दल’ के रूप में मान्यता दी। ‘वंचित बहुजन आघाड़ी’ मतलब होता है “वंचितों व बहुजनों का गठबंधन”।

आंबेडकर ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अकोला और सोलापुर दोनों से चुनाव लड़ा और दोनों ही जगहों पर हार गए। Prakash Ambedkar biography

 

किताबें

प्रकाश आंबेडकर ने कई मराठी और अंग्रेज़ी किताबें लिखी हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

  • आंबेडकरी चळवळ संपली आहे (मतलब: आंबेडकरवादी आंदोलन खत्म हो गया है)
  • अंधेरी नगरी चौपट राजा
  • महाराष्ट्राचा उद्याचा मुख्यमंत्री वारकरी आणि वारकरीच (मतलब: कल का महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री वारकरी और वारकरी ही होगा)
  • Can It Be Stopped! (कॅन इट बी स्टॉप्ड! – क्या इसे रोका जा सकता है!)
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघाचा वैचारिक भष्टाचार (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वैचारिक भ्रष्टाचार)
  • ऐतिहासिक आंबेडकर भवनाचा वारसा आपण जपणार की नाही?? (ऐतिहासिक आंबेडकर भवन की विरासत को हम सहेजेंगे या नहीं ??)

 

संभाले गए पद

प्रकाश आंबेडकर ने निम्नलिखित पदों पर कार्य किया है:

  • 1990-96: मनोनीत सदस्य, 18 सितंबर 1990 से 17 सितंबर 1996 तक राज्यसभा के सदस्य (सांसद)।
  • 1992-96: सदस्य, नियम समिति
  • 1993-96: सदस्य, संचार समिति
  • 1998-99: 12वीं लोकसभा के लिए चुने गए (पहली बार), भारतीय रिपब्लिकन पार्टी संसदीय दल के नेता (सांसद)
  • 1998-99: सदस्य, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण समिति; सदस्य, सलाहकार समिति, मानव संसाधन विकास मंत्रालय
  • 1999-2004: 13वीं लोकसभा के लिए फिर से निर्वाचित (दूसरा कार्यकाल); भारिपा बहुजन महासंघ संसदीय दल के नेता (सांसद)
  • 1999-2000: सदस्य, ऊर्जा संबंधी समिति
  • 2000-2004: सदस्य, सलाहकार समिति, रेल मंत्रालय

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राजरत्न व प्रकाश आंबेडकर के बीच रिश्ता

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डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के वंशज – (दाईं से बाईं ओर) प्रकाश (पौत्र), राजरत्न (प्रपौत्र), आनंदराज (पौत्र), एवं सुजात (प्रपौत्र)

राजरत्न अशोक आंबेडकर भारतीय सामाजिक एवं धार्मिक कार्यकर्ता और डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के प्रपौत्र हैं। उनका जन्म 8 दिसंबर 1982 को हुआ था। वह वर्तमान में डॉ. आंबेडकर द्वारा स्थापित ‘भारतीय बौद्ध महासभा’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष है, और इसके माध्यम से वह भारत में आंबेडकरवाद और बौद्ध धर्म के प्रचार एवं प्रसार का काम कर रहे हैं। दरहसल राजरत्न आंबेडकर डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के बडे भाई आनंदराव के पड़पोते (प्रपौत्र) है, और मुकुंदराव आंबेडकर (बाबासाहेब के भतीजे) के पोते (पौत्र) है। इस नाते से प्रकाश आंबेडकर राजरत्न आंबेडकर के चाचा है।

 

सोशल मिडिया पर

प्रकाश आंबेडकर सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं। Facebook पर उनके 2.15 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स है। Instagram पर भी उनके करीब 57 हजार से अधिक followers हैं। Twitter पर भी उनके 1.40 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स है।


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