डॉ. आंबेडकर के बारे में नोबेल विजेताओं के विचार

समानता और सामाजिक न्याय के हिमायती और वैश्विक चिंतक डॉ. बाबासाहब आंबेडकर ने दुनिया के करोड़ों लोगों को प्रभावित किया है। डॉ आंबेडकर से प्रभावित होने वालों में न केवल उत्पीड़ित, शोषित बल्कि विश्व प्रसिद्ध हस्तियां, सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक और नोबेल पुरस्कार विजेता भी शामिल हैं। – नोबेल पुरस्कार और आंबेडकर

Nobel laureates views on Dr Ambedkar

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Nobel laureates views on Dr. B. R. Ambedkar

यह नोबेल पुरस्कार विजेता बाबासाहेब के काम, संघर्ष और विचारों को अपने विचारों के माध्यम से गौरवान्वित करते है, और उनके विचार डॉ. आंबेडकर की सार्वभौमिक या वैश्विक स्वीकृति की गवाही देता है।

दूसरी ओर, जाति व्यवस्था पर विस्तार से लिखने वाले रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने किसी भी लेखन में डॉ. आंबेडकर का उल्लेख तक नहीं लिया। टैगोर (1861-1941) नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले भारतीय थे।

सामाजिक क्षेत्र में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर का काम महत्वपूर्ण और अद्वितीय है, साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था में उनका मजबूत योगदान है। इसलिए बाबासाहब को भी शांति या अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए था।

इस लेख में आप जानेंगे कि नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के बारे में क्या विचार व्यक्त किए गए हैं। Nobel laureates views on Dr Ambedkar

 

नोबेल पुरस्कार विजेताओं के डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के बारे में विचार

गुन्नार मायर्डल

गुन्नार मायर्डल (1898 – 1987) एक स्वीडिश अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री और राजनीतिज्ञ थे। 1974 में, उन्हें अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

गुन्नार मायर्डल ने बाबासाहेब के बारे में कहा की, अगली पीढ़ी के लिए स्वतंत्र भारत की दिशा तय करने वाले एक महान भारतीय के रूप में डॉ. आंबेडकर की स्मृती पूरी दुनिया में हमेशा अमर रहेगी।

“All over the world, the memory of B.R. Ambedkar will live forever as a truly great Indian in the generation which laid down the direction of independent India.”Gunnar Myrdal

 

दलाई लामा

14वें दलाई लामा (जन्म 6 जुलाई 1935) तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता और तिब्बत राज्य के पूर्व प्रमुख हैं। तिब्बत को चीन द्वारा निगल लिए जाने के बाद, उन्होंने बुद्ध भूमि – भारत में शरण ली। उन्हें 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

दलाई लामा ने अक्सर अपने भाषणों और चर्चाओं में बाबासाहब का उल्लेख किया है। विश्व प्रसिद्ध धर्मगुरू और बौद्ध धर्म के विद्वान परम पावन दलाई लामा कहते हैं,

“बौद्ध धर्म में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। उनके चले जाने के बाद उनके आदर्शों और शिक्षाओं पर खरा उतरना उनके लिए सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होगी।”

एक अन्य स्थान पर – औरंगाबाद में विश्व बौद्ध धम्म सम्मेलन में दलाई लामा कहते हैं,

डॉ. आंबेडकर एक महान नायक हैं। उन्होंने भारतीय बौद्ध धर्म के पुनरुद्धार में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है। डॉ. आंबेडकर समानता की वकालत करने वाले और जाति आधारित भेदभाव की व्यवस्था को खारिज करने वाले महान नेता थे। उनके आदर्शों और शिक्षाओं पर खरा उतरना उन्हें सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होंगी …” Nobel laureates views on Dr Ambedkar

 

नेल्सन मंडेला

नेल्सन मंडेला (जन्म 1918) एक दक्षिण अफ्रीकी रंगभेद विरोधी कार्यकर्ता और दक्षिण अफ्रीका के पहले राष्ट्रपति (1994 से 1999) थे। उन्हें 1993 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

12 अप्रैल 1990 को भारतीय संसद भवन में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के तैलचित्र का अनावरण किए जाने के उपलक्ष्य में नेल्सन मंडेला ने कहा की,

हम डॉ. आंबेडकर के जीवन और कार्य से प्रेरणा लेकर अपना संघर्ष भी उन्हें आधारों पर चलाएंगे, जिन आधारों पर डॉ. आंबेडकर ने भारत में समाज परिवर्तन का प्रयत्न किया और सफलता पाई।

 

 डॉ. अमर्त्य सेन

अमर्त्य कुमार सेन (जन्म 1933) एक भारतीय अर्थशास्त्री और दार्शनिक हैं। 1998 में, उन्हें अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा है कि “Dr. Ambedkar is the father of my economics”.

अमर्त्य सेन डॉ. बाबासाहब आंंबेडकर से काफी प्रभावित थे और उन्हें अपना गुरु मानते थे और शायद बाबासाहब की प्रेरणा से उन्होंने बौद्ध धर्म ग्रहण किया। उन्होंने अपने भाषणों और चर्चाओं में कई बार बाबासाहेब का जिक्र किया है।

अमर्त्य सेन कहते हैं कि,

डॉ. आंबेडकर अर्थशास्त्र में मेरे गुरु हैं। वह दलितों और शोषितों के सच्चे और प्रसिद्ध नायक हैं। उन्हें आज तक जो सम्मान मिला है, वह उससे कहीं ज्यादा के हक़दार हैं। वे भारत में अत्यधिक विवादास्पद हैं, लेकिन उनके जीवन और व्यक्तित्व के बारे में कुछ भी विवादास्पद नहीं है। उनकी आलोचना में जो कहा जाता है वह वास्तविकता से बिल्कुल परे है। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनका योगदान बहुत प्रभावशाली है। इसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

बराक ओबामा

बराक ओबामा (जन्म 1961) संयुक्त राज्य अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति हैं और उन्होंने 2009 से 2017 तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। उन्हें 2009 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

अमेरिकेचे राष्ट्राध्यक्ष बराक ओबामा यांनी 8 नोव्हेंबर 2010 रोजी नवी दिल्लीतील भारतीय संसदेला संबोधित केले.  संसदेतील आपल्या या भाषणात ते म्हणाले की,

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 8 नवंबर, 2010 को नई दिल्ली में भारतीय संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने अपने भाषण में कहा कि,

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन हो या कहां से आए हो। हर इंसान अपनी क्षमता का उपयोग कर सकता है, जैसा कि डॉ. आंबेडकर अपने जीवन के शिखर पर पहुंचे और भारत का संविधान लिखकर आम लोगों को उनके अधिकार दिए।

We believe that no matter who you are or where you come from, every person can fulfil their God-given potential. Just as a Dalit like Dr. Ambedkar could lift himself up and pen the words of the constitution, that protects the rights of all Indians, he had said. – Barack Obama

 

कैलाश सत्यार्थी

कैलाश सत्यार्थी (जन्म 1954) एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने भारत में बाल श्रम के खिलाफ अभियान चलाया और शिक्षा के सार्वभौमिक अधिकार का समर्थन किया। उन्हें 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। – Nobel laureates views on Dr Ambedkar

आंबेडकर जयंती 2017 पर अपने भाषण में, कैलास सत्यार्थी डॉ आंबेडकर के बारे में कहते हैं,

“डॉ. आंबेडकर हे एक असे ज्योतिपुंज आहेत, ज्यांचा जन्म महूच्या एका छोट्याशा ठिकाणी झाला आणि आज तो ज्योतिपुंज इतका विशाल झाला आहे की त्याच्या प्रकाशाला बांधले जाऊ शकत नाही – ना कोणत्या जातीच्या नावाने, ना कोणत्या धर्माच्या नावाने, येथपर्यंत की ना कोणत्या राष्ट्राच्या नावाने.”

कैलास सत्यार्थी ने आगे कहा कि, “बाबासाहब ने उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे ऐसे महापुरुष थे, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, बुद्धि, प्रज्ञा और करुणा के बल पर एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जो समाज में आवश्यक सुधारों को व्यवस्था में बदलने में सक्षम हो।

 

सारांश

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