बौद्ध धर्म का भारतीय समाज पर प्रभाव

बौद्ध धर्म ने कई ऐसे सामाजिक योगदान दिए है, जिसका भारतीय समाज एवं संस्कृति पर गहरा प्रभाव पड़ा है। बौद्ध धर्म का समाज पर प्रभाव व्यापक है।

Influence of Buddhism on Indian Society

 या लेखाला मराठीत वाचा 

Influence of Buddhism on Indian Society
बौद्ध धर्म का समाज पर प्रभाव

बौद्ध धर्म का सामाजिक प्रभाव एवं योगदान

बौद्ध धर्म अपनी जन्मभूमि भारत में अब एक अल्पसंख्यक धर्म है, लेकिन आज भी बौद्ध धर्म का भारतीय समाज पर गहरा प्रभाव है। इस लेख के माध्यम से हम बौद्ध धर्म के सामाजिक योगदान को जानेंगे जिसने भारतीय संस्कृति पर बहुत प्रभाव डाला हैं। – बौद्ध धर्म का समाज पर प्रभाव

बौद्ध धर्म ने कई ऐसे सामाजिक योगदान दिए है, जिसका भारतीय समाज एवं संस्कृति पर गहरा प्रभाव पड़ा है। बौद्ध धर्म का समाज पर प्रभाव व्यापक तथा समृद्ध है। इस लेख में हम बौद्ध धर्म के उन 12 सामाजिक योगदानों को जानेंगे, जिसका गहरा प्रभाव हिंदू धर्म, भारतीय समाज एवं भारतीय संस्कृति पर पड़ा है।

 

1. बौद्ध दर्शन का हिन्दू धर्म पर प्रभाव :-

बौद्ध धर्म में अहिंसा, सभी जीवों के प्रति प्रेम और सहानुभूति आदि विचारों ने हिंदू धर्म को प्रभावित किया। इसलिए वैदिक लोगों ने अहिंसा की आवश्यकता पर बल देने की आवश्यकता महसूस की।

भारत पर बौद्धधर्म का प्रभाव

 

2. वैचारिक स्वतंत्रता :-

वैचारिक स्वतंत्रता बौद्ध धर्म में गहराई से निहित है, और इसने हिंदुओं के बिना किसी संदेह के वैदिक परंपरा का पालन करने वाले पारंपरिक तरीके को प्रभावित किया है।

बौद्ध धर्म के सामाजिक योगदान

 

3. सद्गुणों का विकास :-

बौद्ध धर्म ने न केवल पंचशील के सिद्धांतों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, इंद्रिय संयम और मादक द्रव्यों से परहेज) का उपदेश किया है, बल्कि उन्हें सिखाया भी है और इस प्रकार सद्गुणों के विकास में योगदान दिया है।

 

4. समानता सिद्धांत का प्रभाव :-

तथागत गौतम बुद्ध ने जाति, पंथ, वर्ण और सामाजिक स्थिति इन किसी भी चीजों का विचार न करते हुए सभी व्यक्तियों के बीच समानता (equality) स्थापित करने का उपदेश किया। इसने जाति व्यवस्था पर आधारित पारंपरिक हिंदू सामाजिक संरचना को प्रभावित किया।

बौद्ध धर्म का भारतीय समाज पर प्रभाव

 

5. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास :-

बौद्ध धर्म ने लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद की है। चूंकि इस धर्म के मूल तत्व और दर्शन विज्ञान पर आधारित हैं, इसलिए इसकी शिक्षाओं ने लोगों में वैज्ञानिक दृष्टि लाने में मदद की है। 20वीं सदी के विद्वान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे कई प्रतिभाशाली विचारकों ने कहा है कि बौद्ध धर्म सच्चा वैज्ञानिक धर्म या विज्ञानवादी धर्म है।

 

6. नैतिक सिद्धांतों का प्रभाव :-

करुणा, ईमानदारी, प्रेम, परोपकार, अहिंसा, क्षमा, शील (नैतिकता) जैसी नैतिक चीजों पर बौद्ध धर्म जोर देता है। इसका प्रभाव वैदिक हिंदू धर्म के नियतिवाद (भाग्यवाद) पर पड़ा। इसी के कारण बौद्ध धर्म एक स्वतंत्र और प्रभावशाली धर्म है जो हिंदू धर्म से बहुत अलग है।

बौद्ध धर्म का सामाजिक प्रभाव

 

7. बौद्ध धर्म का कला में योगदान :-

बौद्ध धर्म ने वास्तुकला, गुफाओं और मठों की खुदाई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उस समय विहारों, मठों, स्तूपों, मंदिरों, गुफाओं जैसे स्थापत्य क्षेत्रों के निर्माण में विस्फोट हुआ था। इसने अन्य धर्मियों के कला क्षेत्र के निर्माण को भी गति दी। बौद्ध धर्म ने लोगों को वास्तुकला विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया है। यह विकास सुंदर मठों, मंदिरों, स्तंभों, स्तूपों आदि को स्थान देकर प्राप्त किया गया है। आज दुनिया का सबसे खूबसूरत धार्मिक स्थल थाईलैंड में एक शानदार सफेद बुद्ध विहार है।

बौद्ध धर्म का भारतीय संस्कृति पर प्रभाव

 

8. स्थानीय भाषा में साहित्यिक योगदान :-

बौद्ध धर्म तेजी से फैल गया क्योंकि बुद्ध, बौद्ध भिक्षुओं और बौद्ध धर्मप्रचारकों ने स्थानीय भाषा (पाली) में धार्मिक विचार प्रस्तुत किए। उस समय प्रचलित पाली जैसी प्राकृत भाषा का अच्छा विकास हुआ। बौद्ध धर्म ने पालि भाषा और उसके शास्त्रों और अन्य धार्मिक पुस्तकों के लेखन के माध्यम से साहित्य के विकास में योगदान दिया है।

 

9. शिक्षा को बढ़ावा :-

बौद्ध धर्म ने शिक्षा (education) के प्रसार को प्रोत्साहित किया। बौद्ध विहारों और मठों ने शिक्षा के प्रसार के लिए केंद्र के रूप में कार्य किया। बौद्ध भिक्षु महान विद्वान एवं शिक्षक थे। बौद्ध धर्म का समर्थन करने वाले भारतीय सम्राटों और राजाओं ने भी शिक्षा को प्रोत्साहित किया। तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालयों ने प्राचीन काल में अपना बड़ा नाम कमाया था। नालंदा को बौद्ध विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता था। बौद्ध धर्म ने महिलाओं की शिक्षा और निचली जातियों की शिक्षा की भी वकालत की।

भारतीय संस्कृति पर बौद्ध धर्म का प्रभाव

 

10. विदेशों में भारतीय संस्कृति का प्रसार :-

विदेशों में जहाँ भी बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ, वहाँ भारतीय बौद्ध संस्कृति के तत्व फैलने लगे। आज बौद्ध धर्म विश्व के लगभग सभी देशों में फैल चुका है, और लगभग हर देश में बौद्ध हैं। बौद्ध धर्म ने भारतीय और विदेशी समुदायों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

श्रीलंका, चीन, जापान, थाईलैंड, म्यांमार, भूटान, कोरिया, वियतनाम, लाओस, कंबोडिया, सिंगापुर, मंगोलिया, ताइवान, हांगकांग, तिब्बत, मकाऊ, मलेशिया आदि देशों में बौद्ध धर्म प्रमुख धर्म है।

भारतीय संस्कृति में बौद्ध धर्म का योगदान

 

11. आर्थिक विकास को प्रोत्साहन :-

बौद्ध धर्म ने भारत के आर्थिक विकास को गति दी है। बौद्ध चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान का साम्राज्य दुनिया में सबसे समृद्ध और शक्तिशाली था। बौद्ध धर्म उनके राज्य का आधिकारिक धर्म था। उस समय सम्राट अशोक के राज्य में दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था का 34% हिस्सा था। आज, विश्व अर्थव्यवस्था में भारत (#6) की छोटी हिस्सेदारी के बावजूद, चीन और जापान, दो बौद्ध बहुल राष्ट्र, विश्व अर्थव्यवस्था में क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।

 

12. मूर्ति पूजा :-

मूर्ति पूजा बौद्ध धर्म की देन है। मूर्ति पूजा की शुरुआत भी पहली बार बौद्ध धर्म द्वारा की गई थी, और सम्राट कनिष्क के शासनकाल के दौरान ही मूर्ति पूजा पहली बार शुरू हुई थी जब लोगों ने गौतम बुद्ध की मूर्तियां निर्माण की थीं। उसके बाद हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियों का निर्माण और पूजा हिंदू धर्म में शुरू हुई।

भारतीय संस्कृति पर बौद्ध धर्म का प्रभाव


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